Inter Caste Marriage - सही या गलत..



दोस्तों, भारत के नौजवान आज एक बहुत बड़ी समस्या से जूझ रहे हैं, और इसी समस्या पर हम अपने विचार आप सभी के साथ यहाँ बाँटने जा रहे हैं।
यदि हम हिंदी या किसी भी भाषा के फिल्मों की बात करें, तो उसकी पोपुलारिटी का सबसे बड़ा कारण उसके रोमांटिक गाने, हीरो-हीरोइन का रोमांस और अंत में उनका मिलना या शादी होना से है , जो सभी दर्शकों को
बहुत प्रभावित करता है और लोग ऐसे फिल्मों को बहुत पसंद करते हैं, दर्शक चाहते हैं कि हीरो-हेरोइन का मिलन हो और वो न बिछडें लेकिन जब कभी ऐसा नही होता तो हम बड़े उदास होते हैं।
ये तो बात हुई फिल्म जगत की पर हमारी असल जिंदगी में कुछ और ही होता है...
दोस्तों, हमारे देश में शादी की उम्र लड़कियों के लिए 18 वर्ष और लड़कों के लिए 21 वर्ष निर्धारित की गयी है, जिसे हम दूसरे शब्दों में शादी करने के लिए बालिक होना जरूरी है.. कह सकते हैं। आदरणीय सुप्रीम कोर्ट का मानना है कि जो जाति-प्रथा हमारे देश के लिए है, वो देश को दीमक की तरह तबाह कर रही है, कई हिस्सों में बाँट रही है और सुप्रीम कोर्ट का यह भी कहना है कि Inter-Caste मैरिज ही देश को टूटने से बचा सकती है। Inter-Caste Marriage means शादी करने वाले कपल्स की जातियाँ अलग-अलग हों
हमारे देश में शादी दो तरह से की जाती है:- 1. Love Marriage,  2. Arrange Marriage.
अरेंज मैरिज में इंटर-कास्ट का प्रोसीजर न के बराबर होता है इसलिए Generally, Love Marriage ही इंटर-कास्ट को Promote करती है..
हमारा भारत परम्पराओं का देश है, यहाँ संस्कारों से बच्चे बड़े बनते हैं लेकिन लोग कहते हैं कि इंटर-कास्ट मैरिज से परम्पराएँ बिखर रही हैं, लेकिन आपने तीन मछलियों की कहानी सुनी ही है, हम परम्पराओं का सम्मान करते हैं लेकिन याद रखिये यदि पानी एक ही जगह पर ठहरा रहा, तो उससे बदबू आने में देर नहीं लगती ऐसे ही कुदरत का नियम परम्पराओं पर भी लागू होता है, और समय के साथ परम्पराएँ बदलनी चाहिए क्योंकि समाज बदल रहा है।
इंटर-कास्ट मैरिज को आगे क्यूँ लायें या इंटर-कास्ट मैरिज को बढ़ावा क्यों दें:-
(1.)  दो अलग धर्म या जाति के लड़के-लड़की शादी करेंगे, तो उनके परिवार में मेल-जोल बढ़ेगा
(2.)  उंच-नीच की भेदभाव मिटेंगी..
(3.)  एकता में बढोतरी होगी..
(4.)  चोरी-छिपे शादियों का सिस्टम बंद होगा..
(5.)  आपस में प्यार बढ़ेगा..
(6.)  प्यार से रिश्ते अटूट होंगे..
(7.)  नौजवान अपने मनपसंद की लड़का-लड़की के साथ शादी करेंगे..
(8.)  सबसे बड़ी बात देश में जाति-भेदभाव मिटेंगी और समाज में बेहतरीन सकारात्मक परिवर्तन आएगा, जिससे देश जुड़ेगा..
(9.)  इंटर-कास्ट मैरिज से शादी के ऑप्सन बढ़ जायेंगे मतलब एक ही राज्य में पार्टनर की बंदिश नही होगी, पूरी देश/दुनिया में अपने पसंद से शादी कर पाएंगे..
दोस्तों, समाज के दबाव में कई पेरेंट्स अपने बच्चों की खुशियों को भी भूल जाते हैं, भले ही उन्हें इंटर-कास्ट मैरिज से कोई दिक्कत न हो पर समाज क्या कहेगा ये सवाल उनके मन में घर कर चूका होता है, हम आपको बता दें कि सोसाइटी आप जैसे भले नागरिकों के मिलने से बना है, समाज आपसे है, आपने समाज को बनाया है और समाज को आपको चलाना है न कि समाज आपको कभी चलाएगा। सभी नौजवानों से हम यही कहना चाहेंगे कि जीवनसाथी का चुनाव जिंदगी में एक बार होता है, शादी जिंदगी का सबसे बड़ा और अहम फैसला होता है और इस फैसले में अपने पेरेंट्स को, अपने परिवार को जरुर शामिल कीजिये, उनकी राय लीजिए, उनके अनुभव का लाभ उठाइए, आपके पेरेंट्स ने आपसे ज्यादा दुनिया देखी है, वो आपके शुभचिंतक हैं, आपके अपने हैं और उनके दिलों में आपके लिए प्यार है। और सभी पेरेंट्स से हम ये गुजारिश करना चाहेंगे कि वो अपने बच्चों के साथ एक दोस्ताना रिश्ता बनाकर रखें ताकि बच्चे इस प्रकार की कोई भी बात उनके सामने रखने से न झिझकें।
मित्रों, हम इस बात पर प्रकाश इसलिए डाल रहे हैं क्योंकि आज की तारीख में इंटर-कास्ट मैरिज पर फेमिली सपोर्ट न होने के कारण कई यंगस्टर आत्महत्या करके अपने जान गवां बैठते हैं, देश के हर राज्य में, हर दिन सैकड़ों केसेस इस पर सामने आ रहे हैं। जब इस देश में 18 वर्ष का कोई नौजवान अपने पसंद का प्रधानमंत्री चुन सकता है तो अपने पसंद की लड़का/लड़की से शादी क्यों नही कर सकता, क्या समाज का फैसला, हमारे संविधान के कानून से बड़ा है? बिलकुल नहीं!

समाज का फैसला बड़ा है:-

दोस्तों, संविधान के कानून के मुताबिक दो बालिक नौजवान जिनका लव-रिलेशनशिप हो, जो किसी भी धर्म या जाति के हों, बिना शादी किये भी एक साथ रह सकते हैं, वो अपनी मर्जी से शादी कर सकते हैं, अपना मनपसंद जीवनसाथी चुन सकते हैं लेकिन आइये देखते हैं ऐसा होने पर समाज क्या फैसला रहता है-
(1.)  समाज से बर्खाश्त..
(2.)  कई लोगों का हुक्का-पानी बंद..
(3.)  हजार-लाख रुपयों का जुर्माना..
(4.)  परिवार के बाकी सदस्यों से भी किनारा..
समाज को समझना होगा कि इंडिया को यदि एक मजबूत देश के रूप में देखना है तो इंटर-कास्ट मैरिज के चलन को बढ़ाना होगा, जब बाद में घरवालों को रिश्ते एक्सेप्ट करना ही है, समाज को भी देर से अपनाना ही है तो बच्चों को घर से छिपकर शादी करने की क्या जरुरत! इस कथन को गलत साबित मत कीजिये कि “बच्चों की खुशी में ही हमारी खुशी है..” इसे उपयोग में लाइए.. याद रखिये कि जिंदगी की फिल्म तभी हिट होगी जब आपके बच्चे अपनी मनपसंद की शादी करेंगे और आपकी दुआओं से उनकी जिंदगी हँसते-खेलते बीतेगी। अपने जिंदगी का हर अंतिम फैसला अपने खुद का होना चाहिए, पेरेंट्स इस बात को समझें कि उनके बच्चों ने उन्हें शर्मिंदा नही किया, उनका सर नहीं झुकाया, वो डरते थे आपको बताने से, क्योंकि आपने उन्हें कभी अपना दोस्त नहीं समझा, पर आगे से आप उन्हें सीने से लगाएंगे, उनके साथ हँसेंगे, खेलेंगे, बिलकुल एक सच्चे दोस्त की तरह उनका हाथ थामेंगे। इस दोस्ताना माहौल से समाज में बेहतरीन बदलाव आएगा, इंटर-कास्ट शादियों में रुकावट नहीं आयेगी और देश में एकता बढ़ेगी इसलिए ज्यादा से ज्यादा इंटर-कास्ट मैरिज को बढ़ावा दें ताकि हमारा देश और भी संपन्न बन सके.. और जब ऐसा होगा तो इंटर-कास्ट मैरिज में भी अरेंज मैरिज का प्रोसिजर बढ़ेगा, और एक दिन ऐसा आएगा कि सभी लोग लव+अरेंज मैरिज करेंगे मतलब दूसरे कास्ट के लड़का/लड़की के साथ धूम-धाम से शादी...
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नोट:-  इंटर-कास्ट लव  मैरिज हिंदी आर्टिकल का अगला भाग जल्द ही पब्लिश किया जायेगा...


                                             

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