कैसे पायें परीक्षा में 100% सफलता

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:विद्यार्थियों के अध्ययन के लिए कुछ आसान तरीके:

Easy learning tips in hindi यह आर्टिकल बिलासपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जी. डी. शर्मा जी द्वारा लिखा गया है..
दोस्तों, यह पोस्ट काफी बड़ी है लगभग 2900 words की इसलिए आप चाहें तो इसे बुकमार्क में save कर सकते
हैं ताकि एक बार में पूरी पोस्ट न पढ़ने पर दोबारा से इसे आसानी से पढ़ सकते हैं.
1.       पढ़ने और सीखने का कौशल:- सबसे महत्वपूर्ण कार्य जो करना है वह दो स्तर पर होगा- पढाई की वह पध्दति जो आपके लिए काम कर सके उसे कार्यरूप में परिणित किया जाए या स्थापित किया जाये. प्रत्येक व्यक्ति के सीखने की पध्दति अलग होती है. आप स्वयं सर्वश्रेष्ठ रूप में कैसे सीख सकेंगे ये स्वयं समझना होगा. वह कार्य जो आप हाई-स्कुल में शिक्षा प्राप्त करने में करते थे व्यक्तिगत तौर पर सर्वश्रेष्ठ शिक्षा पध्दति के न हो. हाई-स्कुल की पढाई हायर सेकेंड्री स्कुल के पढाई से सरल होती है, परन्तु जब स्कुल शिक्षा से हायर सेकेंड्री शिक्षा के स्तर पर पहुचते हैं तो वह शिक्षा पध्दति इस नई शिक्षण-नीति में फलदायी नहीं होती और इस वास्तविकता को समझ नही पाते हैं यही बड़ी कठिनाई है. यह कठिनाई आपके लिए स्नातक स्तर की शिक्षा के समय भी आती है. आपके समक्ष हाई-स्कुल और हायर सेकेंड्री स्कुल की शिक्षा पध्दति का अंतर उपस्थित होता है जिसे ध्यान में रखकर अध्ययन करना होगा..
जब आप हायर-सेकेंड्री स्कुल के प्रथम वर्ष की परीक्षा करते हैं तब यह समझ पाते हैं कि हाई-स्कुल और हायर-सेकेंड्री की पढाई में अंतर है दुर्भाग्य से उस समय कुछ विद्यार्थी यह विश्वास करने लगते हैं कि वे इससे बेहतर नही कर सकते.. वे कभी अपनी बेहतर क्षमता का प्रदर्शन नही कर पाते और दुर्भाग्य से कुछ तो पूरी तरह निराश होकर बैठ जाते हैं..
यह कुंजी आपको यह समझने में सहायता करती है कि पुनरावृति (दोहराना) एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है और इसे लिखित परीक्षा के 2 सप्ताह पूर्व ही करना है जो कि यह उचित नही है. हम आपको परीक्षा के लिए एक सही तकनीक (प्रक्रिया) से तैयार करने में सहायता करते हैं. एक ऐसी तकनीक बताकर जो आपकी नोट्स लेने की कौशल को बेहतर करती है, हम यह भी बतलाना चाहते हैं कि परीक्षा किस तरह दें और परीक्षा में प्रश्न-पत्र के प्रश्नों को सुलझाने की क्षमता को किस तरह बढ़ाएं..

2.       पढाई की सामान्य बातें:-
पढाई के लिए कुछ सामान्य टीप निम्नांकित हैं:-
(१.) पढाई के लिए एक शांत एवं एक प्रकाशपूर्ण स्थान चुने, यह आवश्यक है कि आप खुद को अनावश्यक बाधाओं से अलग कर लें, दूसरों से स्पष्ट कहें कि आप काम कर रहे हैं एवं एकांत चाहते हैं और काम के बाद आप उनसे मिलेंगे.
(२.) पढाई के लिए आप टेबल अथवा डेस्क का उपयोग करें. पढाई के लिए आप बिस्तर या आराम कुर्सी पर बिलकुल न लेटें, अगर आप चाहें तो बीच-बीच में कुछ देर के लिए विश्राम लें.
(३.) पढाई के लिए दिन का सबसे अच्छा समय चुनें. कुछ विद्यार्थी ब्रम्हमुहूर्त का समय ठीक समझते हैं तो किसी को देर रात्रि का समय ठीक लगता है. दिन का सबसे बेहतर समय चुने जिसमे आप एकाग्रता से अपनी पढाई पूरी कर सकें.
(४.) जैसे ही कक्षा समाप्त होती है अपने क्लास नोट्स की पुनरावृति कर लें.
(५.) दिन के कुछ घंटे गंभीर अध्ययन के लिए निश्चित कर लें एवं उसका कड़ाई से पालन करें.
(६.) अपने आपको शाबाशी दें. इनाम दें. खुद से वादा करें कि यदि आपने इन निश्चित घंटों में गंभीर अध्ययन किया तो कुछ देर मनोरंजन के लिए रखेंगे और जब आप अपने लक्ष्य पर पहुंचें तो अपने दोस्तों के साथ घूमने जाएँ, कोई फिल्म देख आयें.
(७.) अगर आप चाहें तो छोटे-छोटे विराम लें. कहा जाता है व्यक्ति 30 मिनट पूरी एकाग्रचित हो सकता है उसके बाद उसकी एकाग्रता कम होने लगती है. जब आप महसूस करें कि अब आप पूरी तरह से एकाग्र नही हो पा रहे तो उठें, कुछ देर टहलें, कुछ पियें (फलों का रस, कॉफी, दूध, चाय, शर्बत इत्यादि) और फिर बैठें.
(८.) कई बार दूसरों के साथ अध्ययन करने पर आप यह जान सकते हैं कि विषय को पूरी तरह से समझ पायें हैं या नहीं. यदि आपने प्रश्नों के सही उत्तर दिए हैं और उसे आप दूसरों को अच्छी तरह समझा पाने में सफल हो गए तो समझिए कि आपके द्वारा अध्ययन किये गए विषय को आपने आत्मसात कर लिया. वरना आप महसूस करेंगे कि अभी कुछ और मेहनत करना जरूरी है.
(९.) दुसरे विद्यार्थियों के साथ study करते वक्त सावधान रहिये. कुछ student पढाई के प्रति गंभीर न रहकर अपना और आपका मूल्यवान समय नष्ट कर सकते हैं. इसलिए अत्यंत सावधानी से चुनिए कि आपको किसके साथ अध्ययन करना है.
(१०.)                     स्वयं अकेले अध्ययन करें ताकि आप अवधारणा/मूल तथ्यों और जानकारियों को आत्मसात कर सकें. समूह में अध्ययन करें ताकि आप अपना सही आंकलन कर सकें, खुद का मूल्यांकन कर सकें.

3.       पढाई की अच्छी आदतें:-  
स्वयं में अध्ययन की अच्छी आदतें विकसित करना बहुत महत्वपूर्ण है ताकि आप परीक्षा में अच्छे Results ला सकें. आप स्वयं में ये आदतें विकसित करके परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर सकते हैं. नीचे कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं:-
(1.)  अपना दायित्व लें- सफलता प्राप्त करने के लिए आपमें पर्याप्त प्रयास करने की क्षमता, समय देने की क्षमता एवं धीरज की आवश्यकता होती है. कुछ त्याग करना होता है, अपने कार्यों का उत्तरदायित्व स्वयं लेना होता है, तब कहीं सफलता का सेहरा आपके सर बंधता है.
(2.)  आपके लिए क्या महत्वपूर्ण है क्या नही इसे आपसे बेहतर कोई नही जानता. दूसरा कोई आपको सुझाव न दे तो ठीक होगा. आप खुद अपनी प्राथमिकताएं एवं अपना मूल्य जानते हैं उसी को ध्यान में रखकर कार्य करें.
(3.)  आप किस समय एकाग्रचित्त होकर अध्ययन कर सकते हैं? वह समय सुबह है या शाम अथवा रात का... इसे जानिये. खुद सोचिये कि किस समय आप खुद को सबसे ज्यादा केंद्रित एवं गहन एकाग्रता में पाते हैं. उस समय आप सबसे जटिल अध्ययन चुनौती को हल करें.
(4.)  आपने किसी विषय की अध्ययन सामग्री पढ़ी और उसे ठीक तरीके से न समझ पाए तो उसे फिर से न पढकर अपने शिक्षक से परामर्श लें. उस पर अपने साथियों से चर्चा करें, इन्टरनेट पर खोज करें इत्यादि..
(5.)  स्वयं को हमेशा और बेहतर करने के लिए चुनौती देते रहें.  दूसरों से खुद की तुलना करने से बेहतर है खुद से स्वयं की तुलना करना.
(6.)  सकारात्मक बनें. परीक्षा के समय यही सकारात्मकता आपको तनाव और घबराहट से बचाती है.
(7.)  किसी पाठ्य-सामग्री या पुस्तक को सिर्फ सीधे-सीधे पढ़ने के बजाय उसे और दिलचस्प बनाईये जैसे कि महत्वपूर्ण अंश को चिन्हांकित करने के लिए हाइलाईटर का उपयोग करें.
• महत्वपूर्ण अंश के छोटे-छोटे टीप बनाकर नोट करें.
• जिस पाठ को न समझ पायें उसके प्रश्न बनाकर नोट करें.
• पैराग्राफ या विभाग को प्रश्न में परिवर्तित करके पढ़ने, समझने के बाद उत्तर लिखें.
(8.)              आप सिर्फ ज्ञान एवं अपनी इच्छा, अपनी पसंद के लिए पढाई कर रहे हैं न कि परीक्षा के लिए. इससे परीक्षा का तनाव कम होगा और हम एकाग्र होकर अपना कार्य कर पायेंगे, जिससे हम जो भी पढेंगे हमारा ज्ञान बढ़ेगा..

4.    परीक्षा की तैयारी क्या करें.... क्या न करें.....
१.      Study के लिए एक time table बनाएँ और उसका पालन करें.
२.      पढाई के समय (जो आपने तय किया है) से पहले ही हो सके तो सम्पूर्ण अथवा अधिकतर अध्ययन पूरा कर लें.
३.      पर्याप्त व्यायाम, पर्याप्त भोजन, पर्याप्त नींद सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं.
४.      अपने टीचर के परीक्षा लेने की स्टाईल पर पैनी नजर रखिये. वह पढाते समय किस प्रकार के प्रश्न करते हैं एवं उन प्रश्नों के उत्तर किस तरह लिखें इस बारे में क्या बतलाते हैं.
५.      अपनी सम्पूर्ण अध्ययन प्रणाली एवं उनकी गहनता, जानकारी पर एक खोजी नजर डालिए. आत्मावलोकन करिये. फिर इसे अपने शिक्षक द्वारा दिए पाठ्क्रम से एवं दुसरे साथियों से भी तुलना कीजिये.
६.      अपने प्राध्यापक के फोकस और शैली को अपने अध्ययन में जोड़ें. अगर शिक्षक किसी विशेष बिंदु, विषय पोलिसी, उपाय अथवा प्रतिवाद को विशेष रूप से बाल देकर समझाते हैं तो इसे अपने परीक्षा प्रश्न के उत्तर में जरूर लिखें.
७.      “ओपन बुक परीक्षा” के लिए ऐसे अध्ययन करें जैसे आपको क्लोस बुक परीक्षा देना है.
८.      परिभाषाएं एवं महत्वपूर्ण अंश को अच्छे से याद रखें. खासकर क्लोस बुक एक्साम के लिए..
९.      ज्यादा से ज्यादा अभ्यास परीक्षाएं दें और वह भी परीक्षा जैसे माहौल में. इसके बाद उत्तरों को सही उत्तरों से जांचें या अपने दोस्तों के उत्तरों से मिलाएं.
१०.   अलग-अलग तरीकों के अंतर्गत फ्लैश कार्ड एवं फ्लो-चार्ट्स का उपयोग करें.
११.   समस्त विषयों को रोज थोड़ा-थोड़ा पढ़ें.
१२.   जब भी पढ़ें तो सारी चीजों को पहले से इकठ्ठा कर लें जैसे कि पानी, घडी, पेन आदि.. और इस बात का भी ध्यान रखें कि आपका कम्प्युटर भी सही ढंग से काम कर रहा हो..
१३.  जब परीक्षा दे रहे हों तो पहले सारे वो प्रश्न करें जो आपको अच्छी तरह से आते हों और उसके बाद  कठिन सवालों को हल करें..

क्या न करें :-
१.      अपने अध्ययन की पूरी रूपरेखा बनाने के लिए पढाई के समय तक का इन्तजार करना.
२.      दूसरों की बनाई रूपरेखा के भरोसे रहना.
३.      परीक्षा के कुछ दिन पहले जी तोड़ (कमर तोड़) पढाई करना.
४.      परीक्षा के एक दिन पहले रात को पढाई न करें.
५.      बिना विराम लिए लम्बे समय तक पढ़ना. पढाई के हिसाब से एक इंसान किसी भी चीज में 50 मिनट से ज्यादा ध्यान नही लगा सकता.
६.      टालना.
5.   टिप्स- रीविजन(पुनरावृत्ति) समय के लिए:-

• पुनरावृत्ति के लिए पर्याप्त वक्त रखें, जिससे आखिरी समय में परेशानी न हो. इससे आपका आत्मविश्वास भी बढ़ेगा.
• एक समय सारिणी बनाएँ ताकि आप अपनी तैयारी का जायजा ले सकें. इसके लिए थोड़ा वक्त बाकी चीजों के लिए भी निकालें.
• अलग-अलग तरीकों से पुनरावृत्ति करें ताकि आपको पढ़ने में भी मजा आये.
• बहुत ज्यादा चाय, कॉफी या ठन्डे पेय न लें. स्वास्थ्यप्रद खाना समय पर खाएं. भोजन के पोषक तत्व आपके दिमाग को तेज रखने में सहायक होंगे.
• नियमित व्यायाम आपमें ऊर्जा के स्तर को बढ़ाएगा, आपके दिमाग को साफ़ रखेगा और तनाव कम करेगा.

6.. परीक्षा के समय क्या करें.. और क्या न करें:-
• परीक्षा के समय अच्छी नींद लें और परीक्षा के पूर्व कुछ खाकर अवश्य जाएँ..
• परीक्षा के दिन परीक्षा-स्थल पर समय से पूर्व पहुंचकर अपने को सहज कर लें..
• अगर आपका मन सहज विचलित हो जाता है तो अपने साथ ईअर प्लग लेकर आयें और परीक्षा वाले कमरे के पास बैठें.
• प्रश्न पत्र मिलते ही सरसरी नजर से उसे पढ़ें ताकि प्रश्न पत्र को हल करने में समय बाँट सकें.
• प्रत्येक प्रश्न के लिए समय तय करें एवं निर्धारित समय में ही प्रश्न हल करने का प्रयास करें.
• प्रश्न की मांग के अनुसार ही उत्तर दें.
• प्रश्न हल करने के पूर्व उसे दो बार पढ़ लें और उसी के अनुरूप अपने प्रश्न के मुख्य अंश को रेखांकित करें एवं क्रमवार मुख्य-बिंदुओं की सूची बनावें.
• व्यवस्थित उत्तर के लिए शीर्षक का प्रयोग करें. प्रश्न के अनुसार उत्तर को व्यवस्थित करने के लिए समूह, दावा, प्रतिशत का प्रयोग करें.
• पक्ष और विपक्ष बहस करें जब तक प्रश्न की जरूरत हो.
• जब समय कम हो और उत्तर अधिक तब नए हुए तथ्यों को संक्षिप्त में लिखकर समाप्त करें.

क्या न करें:-
• उन विषय पर बात न करें, जिसे प्रश्न में नही पुछा गया हो.
• कोई भी प्रश्न घबराहट में न लिखें, पहले उसके बारे में अच्छे से सोंच लें फिर लिखें.
• उत्तर को एक पैराग्राफ (अनुच्छेद) में न लिखें.
• शोर्ट फॉर्म का प्रयोग न करें जो पढ़ने वाले को पता न हो..
• मुख्य बिंदुओं को अपने दिमाग में दोहराएँ. बिंदुओं का विश्लेषण करें परन्तु उनको प्रारंभिक अनुच्छेद में लिख कर अपना समय नष्ट न करें.
• यह न समझें कि पढ़ने वालों को कुछ नही आता..
• उत्तर के बीच में ही निष्कर्ष नही दें क्रमानुसार दें..
• एक प्रश्न में बहुत अधिक समय न लगाएं.
• अपनी परीक्षा के विषय में सहभागियों से ज्यादा बहस न करें.

7.. परीक्षा तनाव पर बिंदु. :-
• वास्तविक समय-सारिणी का निर्माण करें एवं उसे चिपकाएँ. परीक्षा आने के पहले ही सोचना प्रारंभ कर दें. अपने विषय के महत्वपूर्ण अंशों को अंत समय क लिए न छोड़ें.
• वह विषय जो अत्यंत कठिन लगता है या जिसे आप पसंद नही करते उसके लिए आप संक्षिप्त नोट्स बनाएँ ताकि जटिल से जटिल विषय भी सरल तरीके से समझ सकें.
• उसी समय सारिणी का स्वयं के लिए चयन करें जो आपके लिए श्रेष्ठ हो.
• अगर प्रातः काल के समय आप ज्यादा एकाग्रता से पढ़ पाते हैं तो अधिक से अधिक उसी वक्त पढकर रख लें. रात के लिए न छोड़ें क्योंकि एकाग्रता में कमी हो जाती है. यदि आप रात के पढ़ने के आदि हैं तो शाम को ही पढ़ लें क्योंकि परीक्षा के दिनों में पूरी नींद लेना आवश्यक होता है.
• महत्वपूर्ण चीजों की पुनरावृत्ति बहुत अच्छे से करें.
• अगर आप एकाग्र होकर नही पढ़ पा रहे हैं तो दस मिनट का विराम लेकर पढ़ें. लगातार पढ़ने से थकान तो हो ही जाती है और आप बोर भी हो जाते हैं. इसलिए लगातार पढ़ने के बजाय विराम लेकर पढ़ना ज्यादा फलदाई है.
• जो विषय आप ठीक से नही समझ पा रहे हैं उसके लिए दूसरों की मदद लें. और इस समय अपने दिमाग को गाना सुनने, टी.वी. में न भटकाएँ.
• अंत में यह भी न भूलें कि पुनरावृत्ति और परीक्षा के आगे भी जीवन है.


8.. याद करने का आसान तरीका:-
सामान्य से लेकर मुख्य तक पढ़ें. सबसे पहले किताब को सरसरी निगाह से देखें एवं आईडिया लें कि उसके बिंदु क्या हैं? एक अध्याय एवं उसके अंतर्गत जो खंड है उसे पढ़ते चलें.

                            आत्म-अनुशासन  
“आप कभी पर्वतों को जीत नही सकते, अवश्य ही अपने आप पर विजय प्राप्त कर सकते हैं”
                                             - Jm Whittaker
अपनी महत्वकांक्षाओं से व्यक्तियों को दूर रखिये क्योंकि उनकी सोच छोटी ही रहती है.. जो व्यक्ति बड़ा है वह व्यक्ति आपको एह्साह दिलाता है कि आप भी बड़े बन सकते हैं.
                                          - Mark Twain
9. परीक्षा- भय को कम करने के नुस्खे :-
परीक्षा- भय को दो भिन्न तरीकों से देखा जाता है.
    Exam के पहले अवश्यम्भावी तनाव से निपटने का अप्रभावी सामर्थ्य.
    एक सुस्त प्रबल भावात्मक प्रक्रिया जो परीक्षा देते समय हमारी सोच को प्रभावित करती है.
सामान्य दिखने वाले लक्षण:-
   • याददाश्त या स्मरण शक्ति में अवरोध.
    परीक्षा देने के पहले फ़ैल होने का डर.
    शारीरिक लक्षण जैसे – धड़कन बढ़ना, पसीना आना आदि..
    समझने की शक्ति का हास्..
    ध्यान से पढाई न कर पाना व पढाई में मन न लगना.
टीप-1. परीक्षा की तैयारी जल्दी कर लें:-
परीक्षा भय का सबसे सामान्य कारण है समय पर तैयारी की कमी. पढाई के लिए अच्छे से सारिणी बनायें वो भी कम से कम तीन सप्ताह पहले/ आप समझेंगे कि आपको बहुत जल्दी तैयारी शुरू करना चाहिए. पढाई जल्दी शुरू करने का एक फायदा यह भी है कि आप परीक्षा सिर पर आने के समय कमरतोड़ मेहनत  से बच जायेंगे. जो कि परीक्षा भय एक प्रमुख कारण है.
टीप-2. अच्छी नींद लें:-
नियमित अच्छी नींद लेना तनाव से बचने का बेहतर तरीका है. एक निश्चित समय पर जागें और सोने जाएँ. जिससे आपके शरीर और मस्तिष्क को समुचित आराम मिल सके. वह अपना कार्य सुचारू रूप से कर सके. विद्यार्थी जो यह नियम का पालन करते हैं उनका प्रदर्शन 30% तक बेहतर होता है उन विद्यार्थियों से जो देर रात तक जागकर पढाई करते हैं अथवा सुबह जल्दी उठकर पढाई करते हैं.
टीप-3. परीक्षा के पहले रात देर तक जागकर पढाई करना आपको चिंता तनाव से भर देगा. दुर्भाग्य से आपके देर रात जागने के बाद कुछ देर सोने पर भी यह कम नही होगा. तनाव को कम करने के लिए शाम को छुट्टी लें, घुमे, उपन्यास पढ़ें, टी.वी. देखें इत्यादि..
टीप-4. अगर परीक्षा के पहले रात में न पढ़ना आपके तनाव को बढता है तो पहले दिन में ही विषय के मुख्य भाग, महत्वपूर्ण नोट्स को फिर से ध्यान पूर्वक पढ़ लें. पर यह तभी सम्भव है जब आपने पहले से ही परीक्षा की तैयारी पूरी कर ली हो.
टीप-5. आपको किस तरह का परीक्षा देना है यह सोचें क्योंकि यह परीक्षा तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है. एक निश्चित तैयार योजना आपको फ़ैल होने के डर से बचाती है. अपने आप में आत्मविश्वास जगाएं जो आपको pass होने में सहायता करती है.
टीप-6. बेहतरीन करने का लक्ष्य रखें. अक्सर जब परीक्षा समय में सब ठीक नही हो पाता, कुछ गलत होने लगता है तो स्टुडेंट्स नेगेटिव विचारों से भर जाते हैं. जिससे उनका आत्मविश्वास डगमगा जाता है और खुद पर भरोसा नही रहता. इस नकारात्मकता को तुरंत पहचाने और बलपूर्वक रोकें. अपने इन विचारों को छोड़कर कार्य पर ध्यान दें. परीक्षा में अपनी योग्यता का प्रदर्शन, उसका परिणाम, उस परिणाम पर माता-पिता और दोस्तों की प्रतिक्रिया, इन सबका मिला-जुला असर विद्यार्थी पर परीक्षा के तनाव के रूप में दिखाई देता है.
शिक्षा का मुख्य उद्देश्य है विद्यार्थी को जीवन जीने की कला सिखाना. उसके दिमाग को विकसित करना, उसे सत्य का सामना करने की हिम्मत देना. उसे सोचना, समझना, एकीकृत करना, सिद्ध करना, सिखाना ही शिक्षा का उद्देश्य है. उसे यह जानना है कि (शिक्षा के माध्यम से) पहले खोजा गया ज्ञान क्या है एवं शिक्षित होकर वह खुद ही अपने प्रयत्नों से ज्ञान की नई खोज कर सकता है...
                                                     (प्रो.जी.डी. शर्मा)
                                                       कुलपति          
बिलासपुर विश्वविद्यालय बिलासपुर







We are grateful to Pro. G.D. Sharma Sir (Voice-Chancellor of Bilaspur University Bilaspur) for sharing this easy learning tips in hindi with all students & HSC Readers.

हिंदी अनुवादक:- डॉ.(श्रीमती) जयश्री शुक्लाप्राध्यापक. महामाया शासकीय महाविद्यालय रतनपुर.
& थैंक्स शुक्ला मैम English Version को हिंदी में ट्रांसलेट करने के लिए हम आपके आभारी हैं.. Thanks a lot!.

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