दिशा- सही या गलत

         दिशा- सही या गलत
यवक्रीत, वेदों का सम्पूर्ण ज्ञान हासिल करने के लिए भगवान इन्द्र की कठोर तपस्या कर रहे थे. एक दिन उनकी तपस्या से खुश होकर भगवान इन्द्र प्रकट हुए तो उसने वर माँगा, “देवराज, मैं सिर्फ यही चाहता हूँ कि मुझे सारे वेद अपने आप ही आया जाएँ और मुझे किसी भी प्रकार की मेहनत या अध्ययन न करना पड़े.” इतना सुनते ही इन्द्र हंसते हुए बोले, “देखो वत्स, उचित यही होगा कि तुम किसी योग्य गुरु के मार्गदर्शन में अपनी मेहनत से अध्ययन करो और वेदज्ञान प्राप्त करो..” इतना कहकर इन्द्र वहाँ से चले गए. परन्तु यवक्रीत अपनी जिद पर अड़े रहे और अपनी तपस्या जारी रखी.
एक दिन जब यवक्रीत गंगा स्नान करने जा रहे थे तब उन्हें गंगा किनारे पर एक बूढ़ा बैठा नजर आया. वह किनारे से बालू की मुठ्ठी भर रहा था और उसे गंगा की बहती धारा में फेंक रहा था.
उसकी इस अजीब हरकत पर हैरान होकर यवक्रीत ने पुछा, “आप ये क्या कर रहे हैं, बाबा?”
बूढ़े ने उत्तर देते हुए कहा, “ बेटा गंगा पार करने में लोगों को बड़ा कष्ट होता है. सोचता हूँ कि रेट डालकर गंगा के उस पार तक एक लंबा बाँध बना दिया जाए जिससे कि सभी लोगों को आने-जाने में असुविधा का सामना न करना पड़े.
यह सुनते ही यवक्रीत को बहुत हंसी आई और उसने बाबा से कहा, “बाबा! बहती हुई धारा में रेत डालकर बाँध कैसे बनाई जा सकती है? आप व्यर्थ ही मेहनत कर रहे हैं.”
बूढ़े आदमी ने कहा, “क्यों, मेरी मेहनत आपको व्यर्थ क्यों लगती है? जब आप वेदों का अध्ययन किये बिना वेदों का पार पाने के लिए तपस्या कर रहे हैं ठीक उसी तरह मैं भी गंगा में बांध बनाने की कोशिश कर रहा हूँ..” यवक्रीत को अपनी गलती समझ में आ गयी.. वो बूढ़ा आदमी कोई और नहीं बल्कि भगवान इन्द्र थे जो यवक्रीत को यह समझाने के लिए आये थे कि बिना सही दिशा में मेहनत किये सफल नहीं हुआ जा सकता!

मित्रों, सफलता सरलता से नहीं मिलती उसके लिए हमें बहुत ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. पर बात मेहनत पर ही सिमट कर नहीं रह जाती. यदि आप सही दिशा में मेहनत नहीं कर रहे हैं तो वो भी किसी काम का नहीं.. यदि आप बहती नदी पर एक-एक मुठ्ठी रेत डालकर पूल बनाना चाहते हैं तो यह मेहनत नहीं कहलायेगा क्योंकि इससे कभी भी आप पूल नहीं बना सकते, बस अपनी ऊर्जा खर्च कर सकते हैं. ठीक उसी तरह आप हर दिन मेहनत कर रहे हैं पर आपकी दिशा गलत है तो वो मेहनत भी किसी काम का नहीं! आपको सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि आपकी मेहनत सार्थक है और आपकी दिशा सही है. क्योंकि आप एक बार अपनी दिशा के बारे में Sure हो गए तो फिर आप जितनी ज्यादा ताकत लगाएंगे, जितना जितना ज्यादा मेहनत करेंगे उतनी तेजी से अपनी मंजिल पर पहुंचेंगे.
                                                                                          धन्यवाद!

                                           -----सही दिशा-----
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