बड़ा फर्क Short Motivational Story in Hindi

एक आदमी सुबह सवेरे समुद्र के किनारे टहल रहा था।  उसने देखा कि लहरों के साथ सैकड़ों स्टार मछलियाँ तट पर आ जाती हैं।  जब लहरे पीछे जाती हैं तो मछलियाँ किनारे पर ही रह जाती हैं,  और धुप से मर जाती हैं।  लहरे उसी समय लौटी थीं और स्टार मछलियाँ अभी जीवित थीं।  वह आदमी कुछ कदम आगे बढ़ा, उसने एक मछली उठाई और पानी में फेंक दिया।  वह ऐसा बार-बार करता रहा।  उस आदमी के ठीक पीछे एक और आदमी था, जो हैरानी से उसे देखे जा रहा था और वह यह नहीं समझ पा रहा था कि आखिर ये क्या कर रहा है! वह उसके पास आया, और उसने पूछा, "उतने समय से तुम ये क्या कर रहे हो? यहाँ तो सैकड़ों स्टार मछलियाँ हैं.। तुम भला कितनों को बचा सकोगे? तुम्हारे ऐसा करने से आखिर क्या फर्क पड़ने वाला है ?"
उस आदमी ने कोई जवाब नहीं दिया, वह दो कदम आगे बढ़ा, उसने एक मछली उठाया और पानी में फेंक दिया और फिर उसने कहा- " इससे इस एक मछली को तो फर्क पड़ता है। "


हम कौन-सा फ़र्क डाल रहे हैं? बड़ा या फिर छोटा, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।  
आप अपने किसी भी कार्यक्षेत्र में देख लें, कई लोग आपको ऐसे मिलेंगे जो आपसे बोलते होंगे कि तेरे अकेले के ऐसा सोचने से या फिर ऐसा कर लेने से क्या फर्क पड़ने वाला है।  कई ब्लॉगर्स, मोटिवेशनल राइटर और स्पीकर लोगों से भी कई लोग कहते हैं, कि तुम्हारे अकेले के अच्छे विचार लिखने से कितने लोगों में फर्क पड़ेगा, या किताब, ब्लॉग, इन सबको पढ़कर कौन-सा बड़ा फर्क पड़ने वाला है? लेकिन दूरंदेशी शुरू से ही इस बात को समझते आ रहे हैं और कई लोगों ने यहाँ तक कह दिया है कि यदि इंसान किसी चीज में परिवर्तन चाहे तो बदलाव होने में देर नहीं लगती। इस दुनिया में ऐसे मछली रूपी बहुत लोग हैं जो नकारात्मकता, परेशानी से घिरे हुए हैं।  हम एक साथ ही सबको पॉजिटिव रखने में मदद नहीं कर सकते पर हमारे द्वारा एक भी आदमी की लाइफ में कुछ अच्छा फर्क पड़ता है तो हमारे तो इससे बड़ी ख़ुशी की बात क्या होगी!

दोस्तों, हम दूसरों के अंदर कभी अच्छा फर्क, सकारात्मक बदलाव ला सकें ये बाद  बात है लेकिन हमें सबसे पहले खुद के अंदर एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव लाना है तभी  दूसरों के अंदर कुछ बड़ा फर्क लाने में अपना योगदान दे पाएंगे।  इसलिए आप खुद में बड़ा और सकारात्मक फर्क लाएं और एक दिन ऐसा होगा जब किसी एक मछली मतलब एक इंसान को भी सकारात्मकता के समुद्र पर हमें डालना नहीं पड़ेगा। 


नोट:- यह कहानी शिव खेड़ा जी की किताब You can Win से प्रेरित है।

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