स्वामी विवेकानंद जयंती पर विशेष

दोस्तों, आज 12 जनवरी है।  राष्ट्रीय युवा  दिवस और स्वामी विवेकानंद जयंती।  हम सब युवाओं के लिए आज का दिन बहुत ही Special है। Youth के लिए स्वामी विवेकानंद जी ने जो बातें कहीं हैं, उनकी सारी बातें हमें सफलता के शिखर तक पहुंचा सकती हैं यदि हम उन्हें अपनी असल जिंदगी में उतारना सीख जाएँ।  स्वामी विवेकानंद जी के Quotes मुर्दों में जान फूँक देने वाले होते हैं, उनकी बातें Youth को Inspire करतीं हैं।


आज 12 January से हम हमारी सफलता  पर विद्वानों, महापुरूषों के Quotes को अपनी Language में Describe करने का प्रयास करेंगे। इसलिए इसकी शुरुआत हम स्वामी विवेकानंद जयंती के शुभ अवसर पर स्वामी जी के Quotes के साथ ही करना चाहेंगे।

औरों से उत्तम बातें सीखकर उन्नत बनो।  जो सीखना नहीं चाहता वह तो पहले से मर चूका है।
                                              -स्वामी विवेकानंद।

लगातार आगे बढ़ने के लिए सीखना बहुत जरूरी है।  दूसरों से ज्यादा से ज्यादा सिखने के लिए प्रयत्नशील रहिये।  हर इंसान से हम कुछ न कुछ नया सीखते हैं।  दूसरों के अनुभव से हम सीख सकते हैं, किसी की सफलता और किसी की असफलता से हर दिन कुछ नया सीखने को मिल सकता है।  दूसरों से अच्छी बातें सीखने के लिए हमें हमेशा आगे रहना चाहिए।  जो सीखना चाहता है, जिसने सीखना जारी रखा है उसके लिए सफलता के दरवाजे खुले रहेंगे लेकिन जो यह समझता है कि वही सबसे बड़ा ज्ञानी है, उसके लिए कुछ नया सीखना या दूसरों की अच्छाइयों से सीख लेना समय की बर्बादी है तो वह खुद अपने असफलता की तैयार में लगा हुआ रहता है।  याद रखिये - सीखना बंद तो जीतना बंद।  यह बात हर क्षेत्र के लिए कही गयी है।


साहस न छोडो,  शुद्ध अमृत अप्राप्य हो तो कोई कारण नहीं कि हम विष खा लें।
                                              -स्वामी विवेकानंद।    

सफलता प्राप्त करने के लिए साहस का होना बहुत ही ज्यादा जरूरी है।  आपने सफलता प्राप्त करने के लिए बहुत कोशिश की पर आप सफल नहीं हुए, इसका मतलब यह नहीं कि आप बिस्तर पर सिर्फ सोये रहेंगे।  रोते रहने से, उदास होकर बैठे रहने से आपके हाथ कुछ नहीं लगने वाला।  एक बार फिर से अपनी ताकत के साथ उठिए, आगे बढ़ने के लिए आपके पैर लडख़ड़ायेंगे, लेकिन पूरे साहस के साथ, पूरे जूनून के साथ आप चलते जाइए, बिना थके और बिना रुके आप कब अपने मंजिल तक पहुँच जाएंगे, इसका आपको पता तक नहीं चलेगा।


 धैर्यहीन व्यक्ति कभी भी सिद्ध नहीं हो सकता।
                                           -स्वामी विवेकानंद।

यदि किसी विद्वान से पूछा जाए कि एक सबसे छोटे वाक्य में यदि उसे सफलता का रहस्य बताना हो तो वह कहेगा- धैर्यवान बनो।  दोस्तों जिसके पास धैर्य है वह जीवन में जो भी चाहे वह प्राप्त कर सकता है। धैर्यहीन होना असफलता की कामना करने के समान है।  धैर्य के साथ बस एक-एक कदम चलते जाइए, यह मत देखिये कि कदम कितनी छोटी है या रास्ता कितना लम्बा है, बस धीरज रखिये क्योंकि आपकी सफलता धैर्य  के साथ डंटे रहने पर ही डिपेंड करेगी।



हर एक काम में सफलता प्राप्त करने से पहले सैकड़ों कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है जो उद्यम करते रहेंगे वो आज या कल सफलता को देखेंगे।
                                   -स्वामी विवेकानंद।


जिस दिन आपने सफलता के सपने देखने शुरू किये उस दिन से ही सैकड़ों-हजारों रुकावटें आपके रास्ते का काँटा बनकर खड़ी होंगी, मुसीबतें हमेशा आपको आगे बढ़ने से रोकेंगी लेकिन आपको सभी परेशानियों, कठिनाइयों का डटकर सामना करना है।  जैसे-जैसे आप प्रयत्न करते जाएंगे, परिश्रम करते जाएंगे परेशानियां साइड होती चली जाएँगी।  सफलता के रास्ते पर पड़े सभी कांटे हट जाएँगी और लगातार परिश्रम और अपनी कठिन मेहनत से सफलता का दरवाजा आपके लिए खुल जायेगा।


हम जितना ज्यादा बाहर जाएँ और दूसरों का भला करें, हमारा ह्रदय उतना ही शुद्ध होगा और परमात्मा उसमें बसेंगे। 
               -स्वामी विवेकानंद।
 जो इंसान खुद के बारे में सोचने से पहले दूसरों की भलाई के बारे में सोचता है, जिसका लक्ष्य कभी भी स्वार्थीपन नहीं होता, जो स्वयं के लिए इसलिए जीना चाहता है ताकि उसकी जिंदगी दूसरों की सेवा में लगा सके, हमेशा दूसरों का भला कर सके।  ऐसे इंसान का मन हमेशा शुद्ध होता है, उसके मन में कभी किसी चीज के लिए लालच नहीं आती और ऐसे इंसान के ह्रदय में भगवान वास करते हैं।



 एक विचार लो, उस विचार को अपनी जिंदगी बना लो।  उसके बारे में सोचो, उसके सपने देखो, उस विचार को जियो। अपने मस्तिष्क, मांसपेशियों, नसों, शरीर के हर एक हिस्से को उस विचार में डूब जाने दो और बाकी सभी विचार को किनारे रख दो। यही सफलता प्राप्त करने का रहस्य है। 
                 -स्वामी विवेकानंद।
एक लक्ष्य निर्धारित कीजिये, उसी लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित कीजिये।  अपना पूरा फोकस उस लक्ष्य हासिल करने में लगाइये।  लगातार सोते-जागते, उठते-बैठते उस लक्ष्य के बारे में सोचिये, उसके लिए सपने देखना शुरू कीजिये।  याद रखिये विचार ही जिंदगी बनाते हैं, आपके सोचने का नजरिया ही आपकी कामयाबी तय करता है। यदि आपके विचार को हकीकत में तब्दील करना है तो उसके लिए आपको Action लेना होगा।  मन-मष्तिष्क को कंट्रोल में करना  होगा,आपका मन हमेशा भागने की कोशिश करेगा लेकिन आपको उसे नियंत्रित करके रखना होगा।  शरीर के हर एक पार्ट को उस विचार के पीछे लगाना होगा।  आपके खुद से किये गए सफल होने की कमिटमेंट के बाद  आपके सामने बहुत सारे अन्य विचार भी आएंगे लेकिन यदि आपको सफलता प्राप्त करनी है तो सिर्फ एक लक्ष्य और एक विचार के साथ ही आगे बढ़ना होगा और अन्य विचारों को मष्तिष्क से किनारे करना होगा।  लक्ष्य और विचार स्पष्ट होने चाहिए ताकि आपको अपनी सही दिशा का पता चल सके।


उठो जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए। 
                                            -स्वामी विवेकानंद
यदि आप हिम्मत हारकर बैठ गए हैं, उदास होकर आंसू बहा रहे हैं तो उठ जाइए, जाग जाइए अपने उसी लक्ष्य को निहारिये, भले ही कितनी ठोकरें आपने क्यों न खाई हो लेकिन दोबारा फिर से एक नई शुरूआत कीजिये।  इस बार आप रुकेंगे नहीं, थकेंगे नहीं और तब तक डटे रहेंगे जब तक आप अपनी मंजिल तक न पहुँच जाएँ।  लक्ष्य प्राप्त किये बिना थक कर बैठ जाना आपके सपने को कभी पूरा नहीं होने देगा।  हिम्मत के साथ उठिए और इस बार सफल होकर दिखाइए।



 बस वही जीते हैं, जो दूसरों के लिए जीते हैं। 
                             -स्वामी विवेकानंद।
 हमारी लाइफ इतनी भी लम्बी नहीं कि हम अपने लिए ही जीते चले जाएँ।  अपने लिए ही जिंदगी को जीना सही मायने में जिंदगी को काटना है इसका मतलब यह नहीं कि सचमुच आप अपनी लाइफ को एन्जॉय कर रहे हैं। असल बात यह है कि आपके कारण किसी दूसरे की आँखों में झलकने वाली ख़ुशी आपके लाइफ की सबसे बड़ी ख़ुशी है।  हम पहले से ही खुद के बारे में ही सोचते आ रहे हैं इसलिए इस ख़ुशी का अंदाजा हमें मालूम नहीं है लेकिन जिस दिन हम दूसरों के लिए जीना सीख जाते हैं बस उस दिन समझ जाते हैं की यही है असली जिंदगी।


 जो तुम सोचते हो वो हो जाओगे।  यदि तुम खुद को कमजोर समझते हो तो तुम कमजोर बन जाओगे लेकिन अगर तुम खुद को ताकतवर समझते हो तो तुम ताकतवर हो जाओगे। 
                       -स्वामी विवेकानंद।
पूरी दुनिया इस सोच के दम पर ही चलती है।  हम आज जो कुछ भी हैं या कल जो कुछ भी बनेंगे वो सब हमारी सोच का परिणाम है।  आपके सोचने का तरीका ही आपकी सफलता तय करता है इसका उल्टा आपके सोचने का तरीका ही आपकी असफलता को डिफाइन करता है।  यदि आप पॉजिटिव सोचते हैं तो रिजल्ट पॉजिटिव आएगा और यदि नेगेटिव सोचते हैं तो रिजल्ट नेगेटिव।  ये एक साईंस भी है, क्योंकि हम जैसा सोचते हैं उसकी के अकॉर्डिंग एक्ट करते हैं।  Negative thinking के साथ आगे बढ़ेंगे तो उसका Result Failure की तरफ जायेगा और Positive thinking के साथ आगे बढ़ेंगे तो उसका Result Success के रास्ते तक हमें लेकर जायेगा।
यदि हम  अपने सोच में या सोचने के तरीके में थोड़ा-सा भी बदलाव करें तो हमारी लाइफ बदल सकती है।  Thinking Power है जड़ है हमारी सफलता और असफलता का।  इसलिए आप जैसा सोचेंगे आप वैसा ही रिजल्ट पाएंगे।  अच्छा Feel करेंगे, अच्छा सोचेंगे तो आपके साथ अच्छा ही होगा लेकिन Negative Feel करेंगे, नेगेटिव  सोचेंगे तो आपके साथ वही होगा जो आप नहीं चाहते।



दोस्तों, आज Youth को इन विचारों की बहुत ही ज्यादा जरूरत है।  हम स्वामी विवेकानंद जी के जन्मोत्सव पर यही कामना करते हैं की आने वाली पीढ़ी और आज के सभी युवा पीढ़ी उनके विचारों के साथ आगे बढ़ने का प्रयास करेंगे और सफलता हासिल करेंगे।

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सफलता के सोपान -स्वामी विवेकानंद। 
 सफलता के सोपान भाग -२ 


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