असफल बनाने वाले इन 5 वाक्यों को तलाक दे दीजिए

दोस्तों, यदि हम लोगों की भाषाओँ पर गौर करें तो हम उनके अंदर की हिचकिचाहट और डर को पढ़ सकते हैं. इंसान खुद के बारे में क्या सोचता है, वह कितना सकारात्मक है, कितना साहसी है, कितना बातों से वह डरता है ऎसी बहुत सी चीजें उसके भाषा और आदतों में झलकने लगता है. कुछ ऎसी भी लाईने हैं जो हमें कमजोर करती हैं, जो हमें प्रगति के शिखर तक पहुँचने नहीं देतीं .. ऐसे ही पांच वाक्यों के बारे में आज हम इस पोस्ट में चर्चा करने वाले हैं जो हमें कामयाब होने नहीं देते और यदि हमने इन वाक्यों को तलाक दे दिया, इन वाक्यों को हमेशा के लिए छोड़ दिया उस दिन से ही हम अपने भीतर गजब का सकारात्मक बदलाव महसूस करेंगे और उस दिन से हमारी लाइफ पूरी तरह से बदल जायेगी...


                                                      लोग क्या कहेंगे

बहुत से लोग इसलिए अपनी जिंदगी में रिस्क नहीं लेते क्योंकि उन्हें  हमेशा डर रहता है की यदि मैं असफल हो गया तो "लोग क्या कहेंगे"
यही कारण है की लोग दूसरों के डर से नयी-नयी चुनौतियाँ हाथ में  नहीं लेते, आगे बढ़कर पहल नहीं करते इसलिए ज्यादातर ऐसे लोगों के हाथों से अवसर निकल जाता है.
आज इस वर्तमान समय में भी लोग खुद को एक नया लुक देने से कतराते हैं, उन्हें लगता है की यदि मैंने यह हेयरकट करवाई तो लोग मेरा मजाक उडायेंगे! ,मतलब आज भी लोग नया हेयरकट कराने, खुद को एक अच्छा लुक देने और अपने पसंदीदा कपडे पहनने से भी डरते हैं और सब इस एक शब्द के कारण की "लोग क्या कहेंगे"
दोस्तों याद रखिये कुछ करने का सबसे अच्छा और बेहतर समय आज ही का दिन है, यदि कुछ करना है तो कर जाइए.. लोगों को कहने दीजिए जो वो कहना चाहते हैं .. क्योंकि हर बात में गलतियाँ निकालना, किसी को मुफ्त राय देना और किसी के बारे में भला-बुरा कहना इस समाज के बहुत बड़े वर्ग का निःशुल्क रोजगार है..
यदि आप लोगों की ही सोचते रह गए तो आगे कदम बढ़ाना संभव नहीं होगा.
ये लोग बहुत ही जल्दी पलट जाते हैं, मतलब जैसे ही आप सफलता की सीढियां चढ़ते गए उनके मुंह से शब्द निकलते जायेंगे की ' हमें तो पहले से पता था की यह लड़का/लड़की काफी होनहार है, वह शुरू से ही ब्रिलियंट था, उसका आईडिया कमाल का था, हम तो पहले से जानते थे की वो लाइफ में कुछ बड़ा करने ही वाला था..'
दोस्तों, सही दिशा में मेहनत करते आगे बढते जाइए और पूरी ताकत के साथ, पूरे जुनून से काम कीजिये .. लोगों को भूल जाइए., ऐसे शब्दों को कभी मत दोहराइए जो आपको कमजोर करते हों..बस अपने लक्ष्य की ओर बढते चले जाइए.. लोगों को अपना काम करने दीजिए और आप बस अपने काम में आगे बढते चले  जाइये.
इस आर्टिकल को पढते हुए सोचिये की ऐसे कितने कार्य हैं जिन्हें आपने इस डर से छोड़ दिया की लोग क्या कहेंगे.. यदि आपने उस वक्त लोगों के कुछ कहने वाली बात को न सोचा होता तो आज आपकी लाइफ कुछ और और खास ही होती... लेकिन अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा है,, आप आज उठ सकते हैं, आज जाग सकते हैं और दुनिया वालों की नजरों में जो राय आपके लिए है उसे गलत साबित कर सकते हैं.. तो सोचिये मत बस अपने दिमाग से इस एक लाईन को अभी तलाक दे दीजिए की "लोग क्या कहेंगे"



                                              मेरी किश्मत ही खराब है 

किश्मत होती है या नहीं यह मैं नहीं जानता पर मुझे इतना जरूर पता है की इस दुनिया में वही सबसे बड़ा किश्मतवाला है जो एक इंसान है..
मैंने कई ऐसे लोगों को देखा है जो अपनी असफलता के लिए बहाने बनाते हैं, उन्हें लगता है की उनके पास किसी न किसी चीज की कमी है और वो खुद को हमेशा बद्किश्मत बताते हैं. उन्हें लगता है की वो इसलिए ही सफल नहीं हो रहे क्योंकि उनके पास चीजों का अभाव है, या वो जो काम करना चाहते हैं उसके लिए उनके पास साधन नही है... और वो इसी एक गलत सोच को लेकर खुद को बद्किश्मत साबित करते हुए सिर पकडकर बैठे रहते हैं.
और मैं ऐसे लोगों को भी जानता हूँ जो कुछ साधन न होने के बावजूद भी खुद को किश्मत वाला समझते हैं.. उन्हें लगता है की किश्मत ऊपर से लिखाकर हमारे पैदा होते वक्त नहीं आती.. उन्हें किश्मत पर यकीन जरूर है क्योंकि वो सब जिन्दा हैं और कुछ करने के लिए दूसरों की तरह बहाने नहीं बना रहे और न ही घर की चार दीवारी में सिर पकडकर बैठे हुए यह नहीं सोच रहे हैं की उनके साथ कुछ अच्छा नहीं हो रहा है.. वो इसलिए ही खुद को किश्मत वाला समझते हैं क्योंकि उनके अंदर कर्म करने की ताकत मौजूद है और वो न सिर्फ खुद के बारे में सोचते हैं बल्कि उनके सामने खुद से पहले जिम्मेदारियां सामने खडी रहती हैं.
सही दिशा में मेहनत करने वाले को भले ही तुरंत सफलता न मिले पर इतनी गारंटी है की वह आखिर में असफल जरूर नहीं होगा.. मतलब कभी न कभी सफलता उसके कदम जरूर चूमेगी.
याद रखिये चाहे आपकी किश्मत बुरी हो या अच्छी, आप चाहे जो भी समझें लेकिन आगे बढ़ने के लिए आपको मेहनत तो करनी ही पड़ेगी क्योंकि मैंने आजतक ऐसा कोई आदमी नही देखा जिसने बिना मेहनत के कुछ हासिल किया हो.. किसी भी सूरत में आपके मेहनत का महत्व कम नहीं होगा, चाहे कुछ भी हो जाए डटना तो आपको हर हाल में होगा...
इसलिए सीधे-सीधे और खरे शब्दों में कहा जाए तो किसी कोने में बैठकर रोने की बजाये, किश्मत चमकने या किसी लौटरी लगने का ही इंतजार करने की बजाये, ढोंगी-पाखंडी बाबाओं का चक्कर काटने की बजाये, उँगलियों में अलग-अलग रंगों के पत्थर पहनने की बजाये, आप चुपचाप उठिए और पूरी ताकत और समर्पण के साथ अपने कार्य में पूरे जोश के साथ जुट जाइए..
भाग्य और किश्मत को अपना कार्य करने दीजिए और आप बस अपना कार्य करते चले जाइए...
फिर से अपनी इस भाषा पर ध्यान दीजिए और आपको अभी भी लगता है की आपकी किश्मत खराब है या कुछ सही नही हो रहा है तो मैं आपको सार शब्दों में बता दूँ की आप सिर्फ और सिर्फ बहाने बना रहे हैं और खुद को धोखा रहे हैं.
यदि आज भी आपने किश्मत वाले इस बहाने का साथ नहीं छोड़ा तो वो दिन दूर नहीं जब कई अवसर आपके हाथों से निकलते चले जायेंगे और बस आप अपने आंसू पोंछते रह जायेंगे..



                                                                  कल कर लूँगा 

कुछ लोग जो मैंने बहुत देखे हैं, वो अपनी जिम्मेदारियों से भागते फिरते रहते हैं, उन्हें कुछ भी काम सौंपा जाए वो तुरंत उस काम को झटक देते हैं और एक शब्द में बोल देते हैं की मैं आज बहुत ही ज्यादा व्यस्त हूँ, कल कर लूँगा..
मतलब वो अपने सारे काम कल पर टाल देते हैं ..
खास बात यह है की ऐसे लोगों का "कल" कभी नही आता.  ऐसे लोगों को काम सौंपने के पहले ही आपके मन में शंका पैदा हो जाती है की वह काम होगा की नही!
ऐसा नही है की वो काम नही करते या काम करने में असमर्थ होते हैं लेकिन उनके अंदर अजीब-सा ढीलापन होता है.. वह दोस्तों के साथ गप्पे मारकर, बिस्तर पर लेटकर, टी.वी. देखते हुए, मोबाइल पर गेम खेलते हुए ही अपना सारा दिन बर्बाद कर देंगे लेकिन जब उनसे कार्य के प्रगति के बारे में पूछा जाएगा तो उनके पास कोई जवाब नहीं होगा.
ऐसे लोगों से पूरी दुनिया भरी पडी है. कुछ लोग तो ऐसे भी रहते हैं जो काम याद नहीं रख पाते जिसके कारण रात-दिन दूसरों से डांट सुनना पड़ता है.. यदि आपकी भी ऎसी आदत है तो संभल जाइये.. अपनी जिम्मेदारी से मुंह मत मोड़िये, खुद को धोखा मत दीजिए. जो आप अपनी लाइफ में करना चाहते हैं वो आप तब कर पायेंगे जब आप काम को समय रहते ही पूरा कर लें.. यदि आप बार-बार अपने काम कल पर टालते जायेंगे जो जीवन में ज्यादा दूर तक जाना संभव नहीं हो पायेगा...


                                                                         मूड नहीं है!!!

मूड नहीं है वाली भाषा का विकास कहाँ से हुआ उसके इतिहास में मैं नहीं जाना चाहते लेकिन आज इस एक शब्द ने हमारी एक पीढ़ी पर एक बहुत गलत असर डाला है..
मूड नही है वाले इसी एक बहाने के कारण हम आज के काम को कल पर टालते हैं .. पता नही यह मूड कौन सी बला है जिसके लिए हम अपने आपको धोखा देते हैं जबकि हमें पता है की यह हमारे काम में ढीलापन ला देगा जिससे पछताने के सिवाए और कुछ भी नहीं मिलने वाला..
दोस्तों जो काम जरूरी है उसके लिए किसी मूड की क्या जरूरत.. एक बार काम स्टार्ट कर दीजिए मूड अपने आप बन जाएगा..
चाहे मूड हो या न हो जो काम जरूरी हैं उन्हें करके खत्म कर दें,.. यदि आप मूड बनने का इंतजार करते रहेंगे तो कोई आपसे आगे निकल जाएगा क्योंकि सफलता के रास्तों पर चलने वाले व्यक्ति कभी भी सही टाइम का इंतजार नहीं करते उनके लिए हर टाइम सही ही होता है जिसका वो लभी लेना ही जरूरी समझते हैं.. उनके लिए मूड नाम का शब्द किसी बेकार शब्द के समान होता है.. सफलता के शिखर तक पहुँचने वाले लोग मूड के ऊपर निर्भर नहीं रहते हैं .. आप क्यों किसी मूड का इंतजार कर रहे हैं. काम शुरू तो करिये.. आपका काम कब खत्म हो जायेगा आपको पता तक नहीं चलेगा और इस बीच आप मूड नहीं है का प्रयोग भी नहीं करेंगे..
आप भी बस कार्य शुरू कर दें और देखें की इसका कितना गजब का रिजल्ट आता है.. कुछ ही दिनों बाद आपको यह एहसास होना शुरू हो जायेगा की मूड आपके लिए महत्वहीन हो चूका है और अब जब चाहें तब कार्य सकते हैं .. तो आज ही मूड नही है वाले इस शब्द को अपनी डिक्शनरी से बाहर निकाल दें..


                                                      
                                      मुझसे यह नहीं हो सकता/मैं यह नहीं कर सकता..


अधिकांश लोग स्वयं के ऊपर जरा सा भी यकीन नहीं करते, और स्वयं के ऊपर विश्वास नहीं करने के कारण ही अपने अविश्वास की वजह से वे हीनभावना से इतना ग्रस्त रहते हैं की जिम्मेदारियों से बस पीछा छुडाते ही नजर आते हैं.
इस दुनिया में ऐसा कोई भी कार्य नहीं जिसे एक इंसान नहीं कर सकता .. इस दुनिया में ऐसा एक भी व्यक्ति है जो किसी कार्य को करके उसमें सफल हो रहा है तो उसे आप भी खेलते खेलते ही सही लेकिन पूरा कर सकते हैं.
मुझसे यह नहीं होगा/ मैं यह नहीं कर सकता जैसे शब्द असफलता के लिए पहले कदम रखने के समान हैं..
यदि आप शुरूआती दौर में ही मुझसे यह नहीं होगा करके खुद को बोलते हैं तो आप आधी से ज्यादा लड़ाई तो पहले ही हार जाते हैं लेकिन इसके विपरीत उतनी ही सही बात यह है की यदि आप बोलते हैं की इस दुनिया में कोई कर सकता है तो आप भी कर सकते हैं तो आप सचमुच अपनी लाइफ में उन ऊँचाइयों को जरूर छुएंगे जहाँ आप पहुंचना चाहते हैं.
यदि आपको नकारात्मकता का साथ छोडना है तो सबसे पहले यह निश्चय कर लीजिए की आप इस वाक्य को कभी भी नहीं दोहराएंगे और एक नया वाक्य अपनी लाइफ और सक्सेस के लिए उपयोग में लायेंगे की "दुनिया में कोई और कर सकता है तो खेल-खेल में आप भी उसे कर सकते हैं"


मुझे लगता है की हर वह दिन शुभ होता है जिस दिन कोई विचार इंसान के दिल को छू जाए और उसमें बदलने की इच्छा पैदा हो जाए..
इसलिए आज इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद मन के किसी भी कोने में कोई हुक उठी हो तो उसे जाया मत कीजिये.. आपकी लाइफ का हर एक समय बहुत ही कीमती है इसलिए खुद को कमजोर करने वाली बातों से तकरार करना ही फायदेमंद है...

                                                                  धन्यवाद!

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