जापानी अद्भुत गाथा Best Inspirational Story in Hindi

एक ऐसी सच्ची और अद्भुत घटना जो यह सिद्ध करती है कि चुनौतियों के बिना हमारी जिन्दगी बहुत बेकार है. मुसीबतें और बड़ी से बड़ी मुश्किलें ही हमें अपनी जीवन जीने की योग्यता देती है और हम सब उन्हीं से दूर भागने की कोशिश करते हैं...

यह कहानी उज्जवल पाटनी जी की किताब 'जीत या हार रहो तैयार' से ली गयी है और यह मेरी सबसे पसंदीदा कहानियों में से एक है जिसे आपके साथ मैं शेयर करना चाह रहा हूँ..


जापानियों को तजा मछली खाने का बेहद शौक है. दुर्भाग्य से जापान के आस-पास के पानी में ताजा मछलियाँ कम होती चली जा रही थीं. इस कमी को पूरा करने के लिए मछुवारों की नौकाएं आधुनिक और बड़ी होती जा रही थीं. क्योंकि अब उन्हें मछली पकड़ने के लिए पानी में काफी दूर तक जाना पड़ता था.

मुश्किल यह थी कि, जितनी दूर वे जाते, उतना ही वक्त मछलियां लेकर वापिस आने में भी लगता था.. समय ज्यादा लगने की वजह से मछलियाँ बासी हो जाती थीं और ग्राहकों को बासी मछली पसंद नहीं आती थी. इस नई समस्या को हल करने के लिए बुद्धिमान जापानियों ने नौकाओं में बड़े-बड़े फ्रीज़र लगा दिए.. वे मछली पकड़ते और फ्रीज़ में रख देते.. उन्होंने सोचा कि मुश्किल हमेशा के लिए हल हो गयी.. और इस ख़ुशी में मछुआरों की कौम ने मिलकर खूब जमकर जश्न मनाया.. परन्तु अब एक और समस्या आ गयी, ग्राहकों को इतने लम्बे समय तक फ्रीज़ में राखी गयी मछली का स्वाद बदला-बदला सा लगता था, और वे इसकी बहुत कम कीमत देते थे.
मेहनत करके उन्होंने इस नई चुनौती का भी हम ढूंढ निकाला. अब उन्होंने नौकाओं में मछली घर बनवा दिए.. वे मछलियाँ पकड़ते और उन्हें मछली घरों में भर देते.. उन्हें लगा कि मछलियों को मछली घर में समुद्र जैसा ही लगेगा और यह समस्या दोबारा नहीं आएगी. लेकिन फिर से एक नुई समस्या आ गयी.. अब मछलियाँ कुछ समय तक के लिए तो हिलतीं लेकिन फिर जगह न होने पर निढाल मुर्दा के समान हो जाती थीं.  दुर्भाग्य से अब भी ग्राहकों को मछलियाँ ताजा नहीं लगतीं थीं.. कई दिनों तक मछलियों के न हिलने से उनका ताजा स्वाद चला जाता था... इतनी चुनौतियों के बाद जापान मछली उद्योग ने ऐसा क्या कार्य किया कि आज वे बेहद समृद्ध हैं .. कैसे वो ताजा मछली जापान तक लाने में सक्षम हुए..

दोस्तों, चुनौतियाँ ही इंसान की रचनात्मकता को उत्तेजित करती हैं, सवालों के नए-नए हल को ढूंढने पर मजबूर करती हैं. और जापान ने इसका हल ढूंढ ही निकाला .. आज भी जापानी उन मछलियों को मछली घर में ही लाते हैं परन्तु अब वे मछली घर में एक छोटी-सी शार्क डाल देते हैं.. मछलियाँ अपनी रक्षा के लिए इधर-उधर भागती हैं और इस तरह वे सभी क्रियाशील रहती हैं. शार्क कुछ मछलियों को खा जाती हैं लेकिन बाकी बहुत सारी मछलियाँ ताजी हालत में जापान पहुँचती हैं..


इस कहानी से मिलने वाली सामान्य शिक्षाएं:-
१. हर चुनौती अपने साथ एक समाधान लेकर जरूर आती है..
२. चुनौतियों से भागकर हार मानने की बजाये चुनौतियों से जूझो और उस खेल का मजा लो..
३. यदि आपने एक छोटा-सा लक्ष्य प्राप्त कर लिया तो अब बड़े लक्ष्य से जूझो क्योंकि जब तक जूझते रहोगे तब तक जिन्दा रहोगे..

मित्रों, आशा करता हूँ कि जिस तरह इस कहानी ने मेरी लाइफ में एक बड़ा बदलाव लाया उसी तरह यह आपकी लाइफ चेंज करने में भी सहायक सिद्ध हो...
                                                        धन्यवाद!


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