अपने अंदर के रावण को आज ही मारें । Dussehra Special by Kiran Sahu

दोस्तों, आज दशहरा है, जिसे बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है।  आज के दिन भगवान श्रीराम ने दशानन रावण का वध करके बुराई को खत्म किया था।  आइये हम सब भी आज के दिन अपने अंदर छिपे बुराइयों का अंत करें और अपने अंदर के रावण को मारें।
                                                     

मैं अपने अंदर बहुत से बुराइयां देखता हूँ, और शायद कहीं न कहीं ये बुराइयां आपके अंदर भी हो सकती हैं, मुझे लगता है कि मैं इन बुराइयों को एकदम से खत्म नहीं कर सकता और हमारे अंदर कई बुरी आदतें होती हैं जिन्हें एकदम से खत्म नहीं किया जा सकता।

जब भी मैं कम्प्यूटर पर काम करने के लिए बैठता हूँ और अपने काम को कर रहा होता हूँ उस बीच यदि  मेरी माँ का भी कॉल आ जाता है तो मैं उस पर झुंझला उठता हूँ।  वो हमेशा मुझसे कहती है कि अपने बच्चे का हाल-चाल पूछना हर माँ की पहली जिम्मेदारी होती है, ये सुनकर मैं उस पर और भी चिल्ला बैठता हूँ। लेकिन यदि उसी बीच मेरे किसी क्लाइंट का Whatsapp या Call आ जाता है तो उसे मैं बड़े ही प्यार से बात करता हूँ।  मेरे अंदर ऐसी ही कई बुराइयां हैं जो मुझे अपने चाहनेवालों के दिल को ठेस पहुंचाने का कारण बनती हैं।
मैं अपनी माँ से बहुत प्यार करता हूँ लेकिन इसके बावजूद उस पर चिल्ला बैठता हूँ, माँ भी मुझसे बहुत ही ज्यादा प्यार करती है, हर उस माँ की तरह जो अपने बच्चों को उनसे भी ज्यादा प्यार करती है।  माँ यदि दुखी भी हो जाए तो मैं उसे मना सकता हूँ लेकिन क्लाइंट satisfied न हो तो मुझे अपने बिजनेस में बड़े नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

इन बातों से आप समझ या जान चुके होंगे कि मेरे अंदर चिडचिडापन और स्वार्थ की भावना है, जो एक बहुत बड़ी बुराई का सूचक है।  और जिसे यदि मैं जल्दी खत्म नहीं कर पाया तो मुझे इसकी बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

दोस्तों, इस दुनिया में प्यार से बढ़कर और कोई भी चीज नही है, यदि आपको अपने रिश्ते बेहतर करने हैं, अपने चाहनेवालों को खुश रखना है तो जितना हो सके खुशियाँ  ही बाँटिए।  किसी पर चिल्लाने से पहले विचार कीजिये कि क्या वाकई इससे सामने वाले तक आपकी अच्छी इमेज पहुंचेगी। क्या किसी  के दिल को ठेस पहुंचाकर आप सफलता के चरम सीमा तक पहुँच सकते हैं?

हम सब के अंदर बुराइयों का भंडार छिपा हुआ है लेकिन एक बात हमेशा याद रखिये 'बुराई का कद कितना भी ऊंचा हो, वह सत्य से हमेशा छोटा होता है '
रावण बहुत विद्वान थे, लेकिन उनके  घमंड की चिंगारी ने ही उन्हें खत्म कर दिया।  आपके अंदर की बुराइयों को यदि आप नहीं मारेंगे तो वह आपको खोखला करती चली जायेगी।  आपके अंदर जो भी बुरी आदतें हैं, जो भी बुराइयां हैं उनमें से एक बुराई का अंत आज ही कर दें, मेरे अंदर बहुत सी गलत आदतें हैं जो मुझे कभी-कभी डिमोटिवेट  कर देती हैं और मैं बिलकुल नहीं चाहूँगा और आप भी ऐसा कभी नहीं चाहेंगे कि आपकी बुराइयां आपके सक्सेस में बाधा बनें, अपने रिश्तों में रूखापन लाये या किसी भी तरह से आपको अंदर से कमजोर या खोखला करे।  इसलिए आज का दिन बहुत खास है, आज हम अपने अंदर के रावण को मार सकते हैं, चाहे वो हमारे घमंड को खत्म करना हो,  या अपने अंदर की ईर्ष्या को खत्म करना हो , या अपने गुस्से को मारना हो! चाहे जो भी हमारे अंदर बुराइयां हैं हम उसे खत्म करने का प्रयास करें और आज तो अपनी एक बुरी आदत को जरूर मारें ताकि आप एक बेहतर इंसान बनने में सफल साबित हो सकें।

मैं आज अपनी कमजोर करने वाली ज्यादा से ज्यादा बुराइयों को खत्म कर रहा हूँ जो किसी न किसी तरह से
मुझे असफल बनाने में सहयोग दे रही है और मेरे रिश्तों में कड़वाहट भर रही है।  आइये आप भी आज के दिन मेरी तरह अपनी बुराइयों को मारें और अपने अंदर की अच्छाइयों को बढाते जाएँ जिससे एक दिन ऐसा आएगा जब आपके अंदर की अच्छाईयाँ, आपके बुराइयों को खुद पर कभी हावी होने नहीं देंगी और आपकी बुराइयां धीरे-धीरे खत्म होती चली जायेंगी।

आज से मेरी माँ जो मुझे इतना प्यार करती हैं उन्हें मेरी  मैं शिकायत करने का मौका नहीं दूँगा और मेरी इस बुरी आदत को आज ही मैं छोड़ रहा हूँ  ... 

आज के दिन आप अपनी कौन-सी बुराई को मार रहे हैं ? मुझे hamarisafalta@gmail.com पर लिख भेजें ...

                                                                                                                           धन्यवाद !
                                                                                                                          किरण साहू 




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दशहरा महापर्व की हार्दिक शुभकामनाएं!
 

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